
सदस्य पदनाम

सदस्य पदनाम

संस्थापक

राष्ट्रीय अध्यक्ष

प्रदेश अध्यक्ष
संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं भाजपा के तत्कालीन वरिष्ठ नेता आदरणीय अटल जी एवं सुंदर सिंह भंडारी जी लखनऊ में बैठे इस बात पर विचार कर रहे थे कि रामजन्म भूमि आंदोलन के पश्चात भाजपा का विस्तार बहुत तेजी से हो गया है। नवागत सदस्य दीनदयाल उपाध्याय जी के विचार दर्शन और भाजपा की रीति नीति से पूर्णतया परिचित नहीं हो पाते थे। पहले जब संगठन का विकास कैडर से होता था तो भारतीय परंपरा के अनुसार संघ वर्गों और तमाम वरिष्ठ पदाधिकारियों के बौद्धिक कार्यक्रमों से कार्यकर्ता राष्ट्रवादी विचारधारा से परिपूर्ण हो जाते थे।नये परिवेश में उस समय ऐसा संभव नहीं था। ऐसे में दीनदयाल जी के विचारों पर आधारित साहित्य और उनके नीति का प्रयोग करते हुए वास्तविक आधारित प्रदर्शन की आवश्यकता महसूस किया।
इस परिकल्पना को पूरा करने के लिए उन्होंने उस समय के भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कलराज मिश्र जी से चर्चा किया । इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कलराज जी ने अटल जी के ही समकालीन प्रचारक डा शिवकुमार अस्थाना जी को, यह महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंपा।