कार्य पद्धति

संस्थान के प्रमुख कार्य

प्रकाशनः- प्रतिष्ठान के स्थापना के बाद प्रकाशन का प्रारंभ किया। दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन परिचय से लेकर उनके सिद्धांतों को समय समय पर परिभाषित करने वाले विद्वानों के लेख और व्याख्यानों को संकलित कर प्रकाशित और प्रचारित किया।

सदन की कार्रवाई के सजीव प्रसारण से पहले दीनदयाल जी के विचारों को प्रशस्त करने वाले राष्ट्रवादी नेताओं द्वारा दिए गए सदन में दिये गये भाषण को भी संकलित कर प्रकाशित किया गया।

राम जन्मभूमि का वास्तविक सच सामने लाने के लिए तथ्यों,तर्कों एवं चित्रों सहित संपूर्ण जानकारी देने के लिए राम जन्मभूमि का ताला खोलने का आदेश देने वाले न्यायाधीश श्री कृष्ण मोहन पांडेय द्वारा स्वलिखित पुस्तक श्वाईस ऑफ कोन्सिएन्सश् प्रकाशित किया गया। इस प्रकार कुल 27 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है।

इसके साथ ही आध्यात्मिक पंथों पर भी पुस्तकें प्रकाशित किया गया।

समाज सेवा के कार्य

सेवा प्रतिष्ठान के नाम के साथ उद्देश्य पूर्ण कारण से जोड़ा गया है। प्रतिष्ठान की सोच ‘नर सेवा नारायण सेवा‘ है और संगठन इसी अवधारणा को समाज में अंगीकार कराने का प्रयास करता आ रहा है।

इस अवधारणा को पूरा करने के लिए प्रतिष्ठान जहां स्वास्थ्य, चिकित्सा, पर्यावरण व शिक्षा पर अब तक हजारों गोष्ठियों को आयोजित किया वहीं स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर स्थापित कर विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से रोगियों का उपचार किया, प्राथमिक विद्यालयों को गोंद लेकर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया। ग्राम पंचायत को गोद लेकर वहां सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना से ग्रामवासियों को लाभान्वित किया।

इसके अतिरिक्त महिलाओं, युवाओं का कौशल विकास कर उनकी आय को बढ़ाने का कार्य दशकों से प्रतिष्ठान करता आ रहा है।

संगठन द्वारा जन सेवा के प्रेषित वह सुझाव जिन्हें सरकारों ने अंगीकार किया

संगठन के पास डाक्टरों, इंजीनियरों वैज्ञानिकों सहित समाज के सभी प्रबुद्ध वर्गों का समूह है जो समय समय पर समाज के लिए हितकारी योजनाएं बनता है जिन्हें सुझाव के रूप में सरकार को प्रेषित किया जाता है। इनके से कुछ योजनाएं जो अति प्रभावशाली हुई।