संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं भाजपा के तत्कालीन वरिष्ठ नेता आदरणीय अटल जी एवं सुंदर सिंह भंडारी जी लखनऊ में बैठे इस बात पर विचार कर रहे थे कि रामजन्म भूमि आंदोलन के पश्चात भाजपा का विस्तार बहुत तेजी से हो गया है। नवागत सदस्य दीनदयाल उपाध्याय जी के विचार दर्शन और भाजपा की रीति नीति से पूर्णतया परिचित नहीं हो पाते थे। पहले जब संगठन का विकास कैडर से होता था तो भारतीय परंपरा के अनुसार संघ वर्गों और तमाम वरिष्ठ पदाधिकारियों के बौद्धिक कार्यक्रमों से कार्यकर्ता राष्ट्रवादी विचारधारा से परिपूर्ण हो जाते थे।नये परिवेश में उस समय ऐसा संभव नहीं था। ऐसे में दीनदयाल जी के विचारों पर आधारित साहित्य और उनके नीति का प्रयोग करते हुए वास्तविक आधारित प्रदर्शन की आवश्यकता महसूस किया।
इस परिकल्पना को पूरा करने के लिए उन्होंने उस समय के भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कलराज मिश्र जी से चर्चा किया । इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कलराज जी ने अटल जी के ही समकालीन प्रचारक डा शिवकुमार अस्थाना जी को, यह महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंपा।
डाॅ0 अस्थाना जी सेना की एकाउंट सेवा को छोड़कर देश सेवा का व्रत लिया था।संघ के प्रचारक के रूप में विभिन्न जिलों व विभाग क्षेत्रों में संगठन को स्थापित करने की प्रतिभा को देखते हुए उन्हें जनसंघ में भेज दिया गया था।
अस्थाना जी ने 65 समाज सेवियों से कर्ज लेकर प्रतिष्ठान को शुरू किया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय विचारधारा के न सिर्फ वरिष्ठ लोगों को जोड़ा जिसमें स्व० कल्याण सिंह, स्व0 लालजी टंडन स्व० नित्यानंद स्वामी, आ० राजनाथ सिंह आ० भगत सिंह कोश्यारी, आद0 केशरी नाथ त्रिपाठी हृदय नारायण दीक्षित, जैसे शीर्ष नेतृत्व थे बल्कि उस समय युवाओं में शामिल डॉ दिनेश शर्मा, डॉ रमेश पोखरियाल,स्व० प्रकाश पंत डॉ महेंद्र सिंह को भी अपने साथ जोड़ कर उन्हें पदाधिकारी बना कर प्रशिक्षित किया।
इसका प्रमाण है उस समय के प्रतिष्ठान के अनेक सदस्य विभिन्न प्रदेशों में मा0 राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री, मंत्री, मेयर,विधायक, हैं या रहे हैं।
यह संगठन दीनदयाल जी एवं राष्ट्रवादी विचारधारा को प्रकाशित एवं प्रचारित करने वाला देश का प्रथम संस्थान बना। यहीं से सर्वप्रथम भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को विचारधारा पहुंचाने के लिए ‘वर्तमान कमल ज्योति‘ का प्रकाशन शुरू किया गया । भारतीय जनता पार्टी की तरफ से प्रकाशित होने वाली यह पहली पत्रिका थी। यहीं से प्रकाशित साहित्य,केंद्रीय कार्यालय से लेकर अन्य प्रदेशों के भाजपा कार्यालयों से वितरित किया जाता था। हर्ष का विषय है कि आज दिल्ली सहित अनेक प्रदेशों में इस तरह के केंद्र स्थापित हो गए हैं जिससे लक्ष्य प्राप्ति और सुलभ हो गई है।